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अंतरिक शांति का मार्ग
— पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
जीवन की दौड़ में हम अक्सर भूल जाते हैं कि सच्ची शांति बाहर नहीं, हमारे भीतर निवास करती है।
ध्यान का महत्व
प्रतिदिन कुछ क्षण मौन में बिताना, अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करना — यही वह सेतु है जो हमें अपने वास्तविक स्वरूप से जोड़ता है।
"मन ही बंधन का कारण है, और मन ही मोक्ष का।"
तीन सरल अभ्यास
- प्रातः 10 मिनट का मौन — दिन की शुरुआत शांति से करें।
- गायत्री मंत्र जाप — २४ बार, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ।
- स्वाध्याय — रोज़ कुछ पंक्तियाँ अच्छी पुस्तक से पढ़ें।
इन छोटे प्रयासों से जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।
— अखंड ज्योति